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जेएनयू में हिन्दू, बौद्ध, जैन अध्ययन के लिए केंद्र स्थापित होंगे

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय हिंदू अध्ययन केंद्र के साथ-साथ बौद्ध और जैन अध्ययन केंद्र भी खोलेगा। इसमें कहा गया है कि तीन नए केंद्र स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज के तहत स्थापित किए जाएंगे। नए केंद्र स्थापित करने के निर्णय को जेएनयू की कार्यकारी परिषद ने 29 मई को एक बैठक में मंजूरी दी थी। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली को लागू करने का पता लगाने और सिफारिश करने के लिए जेएनयू द्वारा एक समिति का गठन किया गया था। बता दें कि कांग्रेस का आरोप कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आरएसएस के एजेंडे के तहत तैयार किया गया है। नई शिक्षा नीति का ही हवाला देकर दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी में मनुस्मृति पढ़ाने का प्रस्ताव लाया जा रहा था लेकिन सरकार के संकेत पर अब इसे रोक दिया गया है।   जेएनयू में तीन केंद्र स्थापित करने से संबंधित अधिसूचना में कहा गया है कि "कार्यकारी परिषद ने 29.05.2024 को आयोजित अपनी बैठक में नई शिक्षा नीति एनईपी-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली और इंडिक स्टडीज का पता लगाने और विश्वविद्यालय में इसके आगे कार्यान्वयन और संस्कृत स्कूल के भीतर निम्नलिखित केंद्रों की स्थापना के लिए गठित समिति की सिफारिश को मंजूरी दे दी है।'' दरअसल, ये अधिसूचना 9 जुलाई को ही जारी हो गई थी लेकिन मीडिया के सामने यह 12 जुलाई शुक्रवार को सामने आई। हालांकि तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालय इन्फ्रास्ट्रक्चर, टीचरों और अन्य स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने कभी उनका बजट बढ़ाने या अतिरिक्त सहायता इन मदों में नहीं की। लेकिन जैसे ही संस्कृत अध्ययन की बात आती है, सरकार खुश होकर ग्रांट जारी कर देती है। हालांकि देश में संस्कृति हिन्दी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की तरह नही बोली जाती।   *नये एकेडमिक सेशन से हो सकते हैं शुरू* अकादमिक परिषद् की हुई बैठक में ये तय हुआ था कि नई सेंटर एकेडमिक सेशन 2025-26 से इन तीनों सेंटर्स की शुरुआत होगी. इनके नाम हैं - फॉर हिंदू स्टडीज, सेंटर फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज और सेंटर फॉर जैन स्टडीज.   *कैसे मिलेगा एडमिशन* इन तीनों सेंटर्स द्वारा कराए जाने वाले कोर्सेस में एडमिशन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा. इसके लिए कैंडिडेट्स को कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूईटी पास करना होगा. सीयूईटी स्कोरी को जेएनयू एडमिशन के लिए आधार बनाएगा.   *इसके अंतर्गत होंगे स्थापित* ये तीनों ही सेंटर स्कूल और संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज के अंतर्गत स्थापित किए जाएंगे. इस बाबत जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग 29 मई के दिन हुई थी इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई थी. जेएनयू ने एक कमेटी स्थापित की थी जिसका काम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और इंडियन नॉलेज सिस्टम को यूनिवर्सिटी में कैसे लागू करें, इस पर काम करना था.   *‘विकसित भारत’ की तरफ एक कदम* इस बारे में जेएनयू वीसी का कहना है कि ये कदम हमें परंपरा के साथ आधुनिकता की और ले जाएगा. मिथ और रिएलिटी के बीच के अंतर को बताएगा और विकसित भारत के मसौदे की ओर एक नया कदम बढ़ाएगा. यूनिवर्सिटी ने इस बारे में ये भी जानकारी दी कि इस बारे में सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सूचना दे दी गई है. ये एनईपी 2020 के विजन को पूरा करने की ओर यूनिवर्सिटी का एक प्रयास है जहां पारंपरिक भारतीय ज्ञान को मॉडर्न एकेडमिक्स के साथ जोड़ा जाएगा.   *शुरुआत में होंगी इतनी सीटें* इस बाबत अभी बहुत से काम प्लानिंग लेवल पर हैं जिनका इम्प्लिमेंटेशन होना बाकी है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शुरुआत में इन तीनों सेंटरों में 20-20 सीटें होंगी. बाद में इनकी संख्या बढ़ायी जा सकती है. इन सेंटरों में एडवांस्ड स्टडी करायी जाएगी. सिलेबस से लेकर कार्यक्रम की बाकी रूपरेखा जल्द ही तैयार होगी. बेहतर होगा इस बारे में डिटेल में जानकारी पाने और अपडेट से रूबरू रहने के लिए समय-सयम पर आधिकारिक वेबसाइट विजिट करते रहें.   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

नए भारत को सुस्त रवैया पसंद नहीं, उत्प्रेरक एजेंट बने: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस 2022 बैच के उन 181 प्रशिक्षुओं से मिले जिन्हें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के तौर पर शामिल किया गया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि नए भारत को सुस्त रवैया पसंद नहीं है। इसलिए अधिकारियों को उत्प्रेरक एजेंट के तौर पर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र प्रथम सिर्फ नारा नहीं है, बल्कि जीवन का लक्ष्य है। उन्होंने इसे सफल बनाने में साथ देने का आह्वान भी किया।   पीएम के साथ इस बातचीत के दौरान विभिन्न अधिकारियों ने अपने प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। वहीं, प्रधानमंत्री ने 2022 में आरंभिक पाठ्यक्रम के दौरान उनके साथ पिछली बातचीत को याद किया। सहायक सचिव पाठ्यक्रम के बारे में चर्चा करते हुए।   उन्होंने कहा कि इसके पीछे का उद्देश्य प्रशासनिक पिरामिड के शीर्ष से नीचे तक युवा अधिकारियों को अनुभव के आधार पर सीखने का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने यह भी कहा कि आईएएस के रूप में चयन के बाद उन्हें जो सराहना मिली थी, वह अब अतीत की बात हो गई है और अतीत में रहने के बजाय उन्हें भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए। जब वे अपनी आंखों के सामने बदलाव होते देखेंगे तो उन्हें संतुष्टि महसूस होगी। साथ ही कहा कि अब यह उनकी पसंद है कि वे सेवा वितरण में स्पीड ब्रेकर बनना चाहते हैं या सुपरफास्ट हाईवे।    *संपूर्णता का दृष्टिकोण अपनाएं* उन्हें सभी नागरिकों को सर्वोत्तम संभव शासन, विनिर्माण की गुणवत्ता और जीवन की गुणवत्ता प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए। लखपति दीदी, ड्रोन दीदी, पीएम आवास योजना आदि योजनाओं के बारे में बात करते हुए पीएम ने कहा कि इन सभी को इन योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए संपूर्णता के दृष्टिकोण के साथ काम करना चाहिए। संपूर्णता का दृष्टिकोण सामाजिक न्याय सुनिश्चित करता है और भेदभाव को रोकता है।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

छोटे परिवारों से पूरा होगा विकसित भारत का लक्ष्य: जेपी नड्डा

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब भारत का हर परिवार स्वस्थ होगा। यह केवल छोटे परिवारों से ही संभव है। इसके लिए सबको मिलकर काम करने की जरूरत है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल मीटिंग के दौरान कहीं। नड्डा ने कहा कि महिलाओं को परिवार नियोजन के अधिकारों और अनचाहे गर्भधारण के मामलों को रोकने के प्रति जागरूक करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।    मां और बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए गर्भधारण का सही समय और अंतराल विषय पर आयोजित बैठक में नड्डा ने कहा कि केंद्र और राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिक बोझ वाले राज्यों, जिलों और ब्लॉक तक गर्भनिरोधकों की पहुंच हो। उन्होंने कहा कि वैश्विक आबादी में भारत का पांचवां स्थान है। जनसंख्या दिवस पर हमें जनसंख्या को स्थिर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करने का संकल्प लेना होगा।   उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम को इच्छा और सूचना के बाद जन्म के उद्देश्य के साथ चलाया जाए। सरकार का फोकस युवा, किशोर, महिला, बुजु्र्ग समेत सभी के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य पर है। इसके लिए सहयोगी रवैये के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। सही समय, जन्म के बीच अंतराल, परिवार का सही आकार और गर्भनिरोधकों को स्वैच्छिक रूप से अपनाने को सशक्त बनाना स्वस्थ और खुशहाल परिवारों के पोषण के लिए महत्वपूर्ण है।    *मिशन परिवार विकास पर की बात* बैठक के दौरान नड्डा ने मिशन परिवार विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम की सबसे सफल योजना है। इसे शुरुआत में सात राज्यों के 14 बड़े जिलों में लागू किया गया है। बाद में इसे अन्य सभी जिलों और छह पूर्वोत्तर राज्यों में लागू किया जाएगा। उन्होनें योजना के प्रभाव के बारे में बताते हुए राज्यों में गर्भनिरोधकों की पहुंच और मातृ-शिशु दर में आई कमी को लेकर भी चर्चा की। इस योजना से राज्यों में कुल प्रजनन दर टीएफआर में कमी आई।    नड्डा ने कहा कि टीएफआर को स्थिर रखने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है। नड्डा ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीएफआर स्तर को कम करने के प्रयासों में लापरवाही न बरतने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि राज्यों के इनपुट और एनएफएचएस डाटा के आधार पर उन इलाकों के लिए योजनाएं बनाई जाएं, जहां टीएफआर अच्छा नहीं है।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

कैसी होगी 'मोदी बजट' की पहली चाय? कड़वे घूंट में दिखेगा अमृतकाल का विजन!

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। रूस यात्रा से लौटने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहली बैठक अर्थव्यवस्था के शीर्ष जानकार लोगों के साथ की है। 23 जुलाई को बजट पेश करने से पूर्व हुई इस सबसे महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और नीति आयोग के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी के अलावा राव इंद्रजीत सिंह, मुख्य आर्थिक सलाहकार वीए नागेश्वरन और बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख लोग भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के शीर्ष अर्थशास्त्रियों की बैठक में सबके विचार सुने और कुछ बिंदुओं पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की आर्थिक बेहतरी के लिए कड़े कदम उठाने के पक्षधर रहे हैं।   वे लोगों को तात्कालिक लाभ वाली 'मीठी गोली' देने की बजाय दूरगामी बेहतरी के लिए 'कड़वे काढ़े' को बेहतर बताते रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद सत्र की शुरुआत में ही इस बात का संकेत दिया था कि आने वाले बजट में देश के शताब्दी वर्ष तक की उपलब्धियों का खाका खींचा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं अपने इस तीसरे कार्यकाल में देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की बात कहते रहे हैं। वे आजादी के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की बात भी करते रहे थे। ऐसे में माना यही जा रहा है कि केंद्र सरकार आज़ादी के 75वें वर्ष में देश को विकसित देश बनाने के लिए बजट में अहम कदमों की घोषणा की जा सकती है।    *क्या होंगे उपाय?* केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए मूलभूत ढांचे में निवेश को अपना मूलमंत्र बना रखा है। रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने और प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में मांग को बनाए रखने के लिए सरकार एक बार फिर मूलभूत ढांचे में निवेश को अपनी प्राथमिकता बनाए रख सकती है। इसके साथ ही विदेशी निवेश और निजी निवेशकों के द्वारा सौर ऊर्जा, वाहनों के निर्माण, मोबाइल उद्योग सहित प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करवा कर वह देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने की कोशिश कर सकती है। अहम क्षेत्रों में निवेश करने पर औद्योगिक इकाइयों को विशेष छूट दिए जाने का विकल्प भी आजमाया जा सकता है।   *राजनीतिक स्थिति का असर* केंद्र सरकार की राजनीतिक स्थिति पिछली बार की तरह संसद में उतनी मजबूत नहीं रह गई है। अब तक अनुमान यही जताया जा रहा था कि बजट में कठोर कदम उठाने पर उसे सहयोगी दलों का दबाव झेलना पड़ सकता है। अगले डेढ़ साल के बीच भाजपा को छह प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव का सामना भी करना है। लेकिन सरकार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि देश की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए वह कड़े कदम उठाना जारी रखेगी।     वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट निर्माण की प्रक्रिया में अब तक लगभग हर क्षेत्रों के प्रमुख स्टेक होल्डर्स से मुलाकात कर चुकी हैं। कुछ प्रतिनिधियों ने आज की महंगाई के दौर से उपभोक्ताओं के हाथों में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा छोड़ने के उद्देश्य से आयकर सीमा बढाने की मांग की थी। लेकिन जिस तरह सरकार पर आर्थिक दबाव हैं, माना यही जा रहा है कि आयकर में छूट मिलने के कोई आसार नहीं हैं। हालांकि, बजट में गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष योजनाओं में खर्च बढ़ाया जा सकता है।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

आठ हाईकोर्ट्स में नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने देश के आठ अलग-अलग हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिसों की नियुक्ति की सिफारिश की है। दिल्ली, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, मध्य प्रदेश, केरल मेघालय और मद्रास हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिसों की नियुक्ति की नियुक्ति की सिफारिश की गई है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही चीफ जस्टिसों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा।   सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, और जस्टिस बीआर गवई की कॉलेजियम ने इस प्रस्ताव को पारित किया। जस्टिस मनमोहन को दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया। वे अभी दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस हैं। झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस एमएस रामचंद्र राव के नाम का प्रस्ताव रखा गया है। उन्हें वर्तमान चीफ जस्टिस बीआर सारंगी के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद पर ट्रांसफर किया जाएगा।   वर्तमान समय में दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस राजीव शकधर को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस गुरमीत सिंह संधावलिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस नितिन जामदार को केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस आर श्रीराम को मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। बता दें कि जस्टिस श्रीराम भी बॉम्बे हाईकोर्ट के ही जज हैं। जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ताशी रबस्तान को मेघालय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

आप का भाजपा पर आरोप: देश के हर न्यायालय ने भाजपा के षड्यंत्र का पर्दाफाश किया

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े ईडी वाले मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी है। वहीं इस पर आम आदमी पार्टी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस देश के एक के बाद एक हर न्यायालय ने आपके भाजपा षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। अरविंद केजरीवाल की ये जमानत आज पूरे देश के सामने ये साफ कर देती है कि अरविंद केजरीवाल सत्य के साथ खड़े थे, खड़े हैं और खड़े रहेंगे।   दिल्ली सरकार में मंत्री अतिशी ने कहा, 'भाजपा को पता था कि अरविंद केजरीवाल को राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत मिल गई है। और सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत मिल जाएगी इसलिए उन्होंने एक और षड्यंत्र रचा और सुप्रीम कोर्ट में जिस दिन अरविंद केजरीवाल की जमानत का केस आना था उससे पिछले दिन अपने एक और राजनीतिक हथियार सीबीआई से अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करवा दिया। इस देश के एक के बाद एक हर न्यायालय ने आपके भाजपा षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। अरविंद केजरीवाल की ये जमानत आज पूरे देश के सामने ये साफ कर देती है कि अरविंद केजरीवाल सत्य के साथ खड़े थे, खड़े हैं और खड़े रहेंगे।   आतिशी ने कहा कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने भी सीएम अरविंद केजरीवाल को जमानत देते हुए कहा था कि ईडी के पास कोई सुबूत नहीं है, ईडी पक्षपात से काम कर रही है। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी सीएम को जमानत देते हुए, राउज एवेन्यू कोर्ट के जमानत के फ़ैसले पर मोहर लगा दी है। आप नेता संदीप पाठक ने कहा, 'आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा द्वारा रचित तथाकथित शराब घोटाले को ध्वस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत देते वक्त कई महत्वपूर्ण बातें कही थी कि कोई भी सुबूत नहीं मिला है और ईडी पक्षपाती है। क्या अरविंद केजरीवाल जी की गिरफ़्तारी गैर कानूनी है, इसे सुप्रीम कोर्ट ने ऊपर की बेंच को भेज दिया है।    हर सरकार की कोई ना कोई उपलब्धि होती है। मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि मोदी और अमित शाह अगर किसी को चुनाव में हरा नहीं सकते तो उसे फर्जी केस में जेल में डाल देते हैं। मैं मोदी और अमित शाह से यही कहना चाहता हूँ कि वो इस गंदी राजनीति को बंद कर दिल्ली और देश का समय बर्बाद ना करें। ईडी की ओर से उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली केजरीवाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिका में दिल्ली में कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस याचिका को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

सुप्रीम कोर्ट: ईडी मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। अहम बात यह है कि केजरीवाल को यह राहत ईडी से जुड़े मामले में दी गई है और फिलहाल वे सीबीआई की हिरासत में हैं। ऐसे में उन्हें अभी जेल में ही रहना होगा। इससे पहले पीठ ने 17 मई को केजरीवाल की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। दरअसल, ईडी की ओर से उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिका में दिल्ली में कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस याचिका को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है।   कोर्ट ने ईडी की ओर से दायर आबकारी नीति मामले में अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि हम धारा 19 के प्रश्न पर विचार कर रहे हैं। हमने धारा 19 और 45 के बीच अंतर साफ कर दिया है। धारा 19 जांच अधिकारी की व्यक्तिपरक राय है। धारा 45 न्यायालय की ओर से किया गया प्रयोग है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि न्यायालय की शक्ति अधिकारी की शक्ति से अलग होती है। हमने गिरफ्तारी की आवश्यकता, अनिवार्यता को आधार बनाया है। विशेष रूप से आनुपातिकता के सिद्धांत के मद्देनजर, जिसे हमने बड़ी पीठ के पास भेजा है। तो गिरफ्तारी की नीति क्या है, इसका आधार क्या है, हमने संदर्भित किया है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि क्या गिरफ्तारी की आवश्यकता, अनिवार्यता गिरफ्तारी के औपचारिक मापदंडों की संतुष्टि को संदर्भित करती है।   हमने माना है कि केवल पूछताछ से गिरफ्तारी की अनुमति नहीं मिलती। अरविंद केजरीवाल ने 90 दिनों की कैद झेली है। हम निर्देश देते हैं कि केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए। हमें पता है कि वह एक निर्वाचित नेता हैं। हम स्पष्ट नहीं हैं कि क्या हम एक निर्वाचित नेता को पद छोड़ने और सीएम के रूप में काम न करने का निर्देश दे सकते हैं। हम इसे उन पर छोड़ते हैं। जस्टिस खन्ना ने कहा कि हमने चुनाव फंडिंग के बारे में एक प्रश्न भी उठाया है। हाल ही में संविधान पीठ ने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। एक तरह से यह मामला भी चुनावों में फंडिंग से जुड़ा हुआ है। जिसकी गहराई से जांच की गई।   *किस मामले में आया फैसला?*   शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को धनशोधन मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर ईडी से जवाब मांगा था।आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक ने दिल्ली हाईकोर्ट के नौ अप्रैल के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।   *हाईकोर्ट ने क्या कहा था?*   हाईकोर्ट ने मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखते हुए कहा था कि इसमें कोई अवैधता नहीं है और जांच में उनके शामिल होने से बार-बार इनकार करने के बाद ईडी के पास कोई विकल्प नहीं बचा था।   *यहां जानिए पूरा घटनाक्रम*   मुख्यमंत्री को ईडी ने धनशोधन मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। उन्हें एक निचली अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर मामले में 20 जून को जमानत दी थी। हालांकि, ईडी ने अगले दिन दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ईडी ने दलील दी थी कि केजरीवाल को जमानत देने का निचली अदालत का आदेश एकतरफा और गलत था। केजरीवाल को कथित आबकारी नीति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में 26 जून को सीबीआई ने भी गिरफ्तार किया था।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

पिंजौर रत्तपुर कॉलोनी भाजपा नेता की जनसभा में लोगो ने बताई समस्याएं

पिंजौर, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। आगामी 17 जुलाई को मुख्यमंत्री नायब सैनी द्वारा एप्पल मंडी के उदघाटन कार्यक्रम का निमंत्रण देने के लिए स्थानीय रत्तपुर कॉलोनी नजदीक न्यू इंडिया स्कूल एक जनसभा का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य तौर पर पहुंचे सन्तराम शर्मा भाजपा नेता वाइट हाउस पिंजौर पहुंचे, उन्हें स्थानीय लोगो ने कॉलोनी के अंदर जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही पानी की सप्लाई प्रभावित होने की समस्या से अवगत करवाते हुए कहा कि यहा पर सैंकड़ो घर है पानी की सप्लाई बहुत कम समय के लिए आती है वो भी काफी लो प्रेशर में होती है जिसे मुश्किल से पीने के लिए ही एकत्रित किया जाता है जबकि बाकी कार्यो के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है कहा कि इस बारे में कई बार विभाग के अधिकारियों को शिकायत भी कर दी, लोगो ने बताया कि कॉलोनी में करीब ढेड़ बिस्वा से ज्यादा जमीन पड़ी है जिसमें कबाड़ व गन्दगी पड़ी है।    जिससे कॉलोनी वासियो को परेशानी हो रही है, लोगो ने कहा कि उक्त जमीन पर अंबेडकर समुदाय केंद्र बनवाया जाए ताकि यहा के मध्य वर्गीय लोग जो पैलेस में शादी जैसे कार्यक्रम नही कर सकते वो समुदाय केंद्र में कर सके। कहा कि यहा पर लोगो के टहलने व बच्चों के खेलने के लिए पार्क बनवाया जाए, लोगो ने रत्तपुर कॉलोनी रेलवे लाइन के साथ साथ जर्जर हालत सड़क को ठीक करवाने के लिए भी मांग की, भाजपा नेता सन्तराम शर्मा ने कहा कि आगामी 17 जुलाई मुख्यमंत्री नायब सैनी एप्पल मंडी का उदघाटन करने पिंजौर में आ रहे जिसमे ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचकर उनका स्वागत करे और उनके विचार सुने। लोगो की समस्याएं सुनते ही शर्मा ने जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मौके से फोन किया जिस पर विभाग के जेई ने कहा कि वो जल्द इसका समाधान करवाएंगे, उधर गलियो की जर्जर हालत को लेकर नगर परिषद जेई अजय से बात करने पर उन्होंने कहा कि उक्त सड़क का टेंडर 17 जुलाई को खुलने के बाद जल्द उसका काम शुरू हो जाएगा।   हरियाणा-स्टेट ब्यूरो, (सचिन बराड़)।

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Jul 12, 2024

इमरजेंसी की याद में 25 जून को मनाया जाएगा 'संविधान हत्या दिवस' केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लते हुए 25 जून को संविधान हत्या दिवस घोषित किया है. इसे लेकर सरकार ने अधिसूचना जारी किया है. 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लागू किया गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अगले दिन 26 जून को रेडियो पर देश की जनता को इस बात की जानकारी दी. गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट पर जारी अधिसूचना को शेयर कर यह जानकारी दी.   *गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा?*   गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी तानाशाही मानसिकता को दर्शाते हुए देश में आपातकाल लगाकर भारतीय लोकतंत्र की आत्मा का गला घोंट दिया था. लाखों लोगों को अकारण जेल में डाल दिया गया और मीडिया की आवाज को दबा दिया गया. भारत सरकार ने हर साल 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया है. यह दिन उन सभी लोगों के विराट योगदान का स्मरण करायेगा, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के अमानवीय दर्द को झेला था.   उन्होंने आगे लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य उन लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान करना है, जिन्होंने तानाशाही सरकार की असंख्य यातनाओं व उत्पीड़न का सामना करने के बावजूद लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष किया। ‘संविधान हत्या दिवस’ हर भारतीय के अंदर लोकतंत्र की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अमर ज्योति को जीवित रखने का काम करेगा, ताकि कांग्रेस जैसी कोई भी तानाशाही मानसिकता भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न कर पाए।'   *पीएम मोदी ने भी किया ट्वीट*   25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने के सरकार के निर्णय पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाना हमें याद दिलाएगा कि जब भारत के संविधान को रौंदा गया था, तब क्या हुआ था। यह प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है, जिसने आपातकाल की ज्यादतियों के कारण कष्ट झेले, जो भारतीय इतिहास का एक काला दौर था।   *भारतीय इतिहास का विवादास्पद फैसला*   पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का यह फैसला भारत के इतिहास में काफी विवादास्पद रहा है. इसे लागू करने की कई वजहों में से एक राजनीतिक अस्थिरता बताई जाती है. इमरजेंसी के दौरान कई चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. प्रेस पर सेंशरशिप लागू करने के साथ-साथ नागरिकों की स्वतंत्रता को भी सीमित कर दिया गया था.   *इमरजेंसी के बाद इंदिरा की हार*   आपातकाल के दौरान विपक्ष के बड़े नेता जेल में थे, लेकिन उन्होंने एकता दिखाई. विपक्षी के कई नेता सड़क पर उतरे और राष्ट्रपति भवन का घेराव किया, जिनपर कार्रवाई भी हुई. आपातकाल हटने बाद 1977 में चुनाव कराए गए, जिसमें इंदिरा गांधी को हार का सामना करना पड़ा था. उस समय खुद इंदिरा गांधी रायबरेली से चुनाव हार गईं थी.   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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Jul 12, 2024

दिल्ली में बिजली के बढ़े बिलों पर भाजपा का हल्ला बोल अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को पुलिस ने किया अरेस्ट

नई दिल्ली, 12 जुलाई  2024 (यूटीएन)। देश की राजधानी दिल्ली में पानी कि किल्लत पर बवाल शांत नहीं हुआ कि अब एक और नया मामला सामने आ गया है। अब दिल्ली में बढ़े हुए विजली बिल के दामों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। बीजेपी को दिल्ली सरकार का विरोध प्रदर्शन कर ही रही है लेकिन कांग्रेस भी पीछे नहीं है। वो भी आप सरकार को आड़े हाथ लिया है। आज शुक्रवार को बीजेपी ने दिल्ली सचिवालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। जिसमें बीजेपी दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के अलावा पार्टी के नवनिर्वाचित सांसदों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बीजेपी नेता और कार्यकर्ताओं ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।   दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा के नेतृत्व में दिल्ली सचिवालय के समीप भाजपा ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ बढ़ी हुई बिजली के पी.पी.ए.सी. शुल्क को लेकर केजरीवाल सराकर के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रचंड विरोध प्रदर्शन किया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में दिल्ली की आर.डब्लू.ए. प्रतिनिधि एवं भाजपा कार्यकर्ता अपने घरों से बिजली बिल लेकर आए और उन्हे सामूहिक रूप से जला कर केजरीवाल सरकार के खिलाफ इस मुहिम से जुड़े। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा लगाये बैरिगेट्स को प्रदर्शनकारी तोड़कर आईटीओ की ओर बढ़े इस बीच दूसरे बैरिगेट्स के पास पुलिस ने अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा को डिटेन कर आई.पी. स्टेट थाने ले गई जहाँ से कुछ समय बाद चेतावनी देकर छोड़ दिया। वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि पी.पी.ए.सी. का पदार्पण ही दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के कारण हुआ।   2011 में तत्कालीन नागरिक संगठन "ऊर्जा" एवं केजरीवाल के नये आंदोलन के दबाव में शीला दीक्षित सरकार ने बिजली दरें बढ़ाने की जगह 1.5% पी.पी.ए.सी. लगाया। सचदेवा ने कहा कि भाजपा ने इसका जम कर विरोध किया, कुछ नागरिक संगठन कोर्ट भी गये। 2014 में जब दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा था तब तत्कालीन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के साथ आर.डब्ल्यू.ए. का प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन पावर मिनिस्टर पीयूष गोयल के पास गए जिन्होंने पावर डिस्कॉम से बात करके पी.पी.ए.सी. वसूली पर रोक लगाई। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अगस्त 2014 से सितम्बर 2015 तक दिल्ली में बिजली बिलों में पी.पी.ए.सी. नहीं लगा लेकिन अरविंद केजरीवाल सरकार ने फिर से पी.पी.ए.सी. लागू किया। पावर डिस्कॉम बार-बार बिजली दरों को बढ़ाने की मांग करती थी। राजनीतिक लाभ के लिए केजरीवाल ने कभी बिजली के प्रति यूनिट रेट नहीं बढ़ने दिये पर पी.पी.ए.सी. जो 2015 में मात्र 1.7% था को 37% तक लागू कर दिया और अब बी.एस.इ.एस. राजधानी के प्रस्तावित 8.75 के लागू होते ही लगभग 46% हो जायेगा।   वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल ने पी.पी.ए.सी. ने दिल्ली में पावर ट्रैफिक कैल्कुलेट के लिए बिजनेस रेग्यूलेशन प्लान का हिस्सा बना कर इसको लीगल सैंकटीटी दे दी। इसी तरह पेंशन सरचार्ज जो 2015 में एक फीसदी था  7.5% है। मीटर चार्ज एवं लोड अधिभार केजरीवाल के 10 साल में तीन गुना तक बढ़े हैं। सचदेवा ने केजरीवाल सरकार के समय पर प्री पेमेंट कर पॉवर ग्रीड से एडवांस बिजली खरीदने का प्लान ना बनाने की कीमत दिल्ली वाले चुका रहे हैं। यदि समय पर एडवांस पॉवर खरीदी गई होती तो कोई पी.पी.ए.सी. ना लगाना पड़ता केजरीवाल और सुश्री आतिशी जवाब दें पी.पी.ए.सी. 1.5% से 46% तक ले आये कभी वापस क्यों नही हुआ - जब बिजली सस्ती होती है तो वापस क्यों नही लेते। कमलजीत सहरावत ने कहा कि अरविंद केजरीवाल जब राजनीति में आए तो उन्होने कहा था कि मैं तो सिर्फ दो कमरों के फ्लैट में रहूंगा, सिक्योरिटी नहीं लूंगा, पानी फ्री देने और भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर पार्टी से निकालने की बात कहने वाले केजरीवाल आज पंजाब और दिल्ली पुलिस की दो से 3 लेयर की सिक्योरिटी लेकर चलते हैं और तो और पानी को लेकर दिल्ली की जनता दो तरफ से मार झेल रही है।   एक तरफ पीने का पानी मिलता नहीं और अगर बारिश का पानी दिल्ली में बढ़ जाए तो पूरी दिल्ली डूब जाती है। बिजली को लेकर भी केजरीवाल सरकार ने दिल्ली की जनता पर सीधे डाका डाला है। मंच का संचालन कर रहे सांसद योगेन्द्र चंदोलिया ने कहा कि बिजली के दामों में लगातार बढोत्तरी ने दिल्ली की जनता को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली की जनता ने एक ओर पानी के कारण दिल्ली में परेशानी का सामना कर रहा है तो दूसरी ओर केजरीवाल ने मुप्त बिजली का झांसा देकर दिल्ली कीजनता को धोखा दिया है लेकिन भाजपा इस धोखेबाज सरकार को नहीं छोड़ेगी और दिल्लीवालों के हक की लड़ाई लड़ती रहेगी। रमेश बिधूड़ी ने कहा कि जो केजरीवाल आज बिजली के नाम पर दिल्लीवालों को लूटने का काम कर रहे हैं, उसने कहा था कि मैं सरकार में आऊंगा बिजली हाफ पानी माफ करूंगा लेकिन आज गरीब लोगों के घर में अगर एक छोटी सी दुकान खोले बैठे हैं तो उनका बिजली का बिल लगातार हजारों में आ रहा है।  ऐसे गरीब लोगों को लूटा जा रहा है वहीं दूसरी बार वह 100% बिजली के दाम पिछले चार-पांच साल में बढाने का काम किया है। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा की पी.पी.ए.सी. चार्ज का लगना एवं लगातार बढ़ना अरविंद केजरीवाल सरकार एवं पावर डिस्कॉम के अनैतिक गठबंधन का प्रमाण है।   विशेष संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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