चिकित्सीय व्यवस्था की हालात अभी भी ठीक नहीं कोई भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं, फिर भी सफलता पूर्वक होता है प्रसव

चिकित्सीय व्यवस्था की हालात अभी भी ठीक नहीं कोई भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं, फिर भी सफलता पूर्वक होता है प्रसव
गढ़वा,25 सितंबर 2021 (यू.टी.एन.)। जिले में चिकित्सीय व्यवस्था की हालात अभी भी ठीक नहीं है। जो व्यवस्था रांची के अस्पतालों में उपलब्ध है वह तो जिले के सदर अस्पताल में होना चाहिए। जो व्यवस्था जिला अस्पताल में है वह व्यवस्था तो मझिआंव, कांडी सहित अन्य प्रखंडों में होना चाहिए और जो व्यवस्था कांडी व मझिआंव के अस्पतालों में है वह व्यवस्था प्रखंड के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में होना चाहिए। यदि इतना भी राज्य सरकार द्वारा चिकित्सीय व्यवस्था में बदलाव कर दिया जाए तो काफी हद तक लोगों की जान बच सकती है व हो रही लगातार मौतों की अनुपात में अचानक कमी भी आ सकती है।

होता है सफलता पूर्वक "प्रसव".....
चिकित्सीय व्यवस्था खराब है इसके बावजूद भी उपस्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराया जाता है। हालाकि सफलता पूर्वक प्रसव होता है। हम बात कर रहे हैं जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत  चटनिया पंचायत के घोड़दाग गांव में स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र की। जहां मरीजों के लिए कोई भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल खड़ा होता है कि अच्छी व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के बावजूद भी उक्त स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराया जाता है। केवल कांडी प्रखंड ही नहीं बल्कि कई अन्य प्रखंडों के भी लोग प्रसव कराने हेतु गर्भवती महिलाओं को लाते हैं, जहां उक्त स्वास्थ्य केंद्र की एनएम- कुशुम कुमारी द्वारा सफल प्रसव कराया जाता है। तब लोग कहते हैं कि कुशुम कुमारी के हाथ की भी बड़ी विशेषता है।
कभी आन पड़ी ऐसी "नैवत" तो.....
बता दें कि उक्त स्वास्थ्य उपकेंद्र में आक्सीजन गैस की भी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है ताकि जरूरत पड़ने पर जच्चा या बच्चा को ठीक समय पर लगाया जा सके। यदि ऐसी नैवत भी कभी आन पड़ी तो उस परिस्थिति में मझिआंव रेफरल अस्पताल ले जाना होगा। हालाकि मझिआंव अस्पताल में भी बहुत अच्छी व्यवस्था की हालात ठीक नहीं है। तब इसके बाद सदर अस्पताल गढ़वा ही ले जाना होगा। आखिर में जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते क्या होगा, यह भगवान भरोसे ही है।

अति जर्जर स्थिति में है "सड़क".....
वहीं उक्त स्वास्थ्य उपकेंद्र तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क भी नहीं है। कांडी-मझिआंव मुख्य सड़क से लेकर उक्त स्वास्थ्य केंद्र तक कि सड़क अति जर्जर स्थिति में है। उबड़-खाबड़ सड़क में दुर्घटना होने का डर हमेशा बना रहता है। साथ ही प्रसव के लिए लाई जा रही दुःख से कराहती महिला को टेम्पू, कमांडर सहित अन्य वाहनों में ही प्रसव हो जाने का खतरा भी बना रहता है। 
क्या कहती हैं "एनएम"....
इस सम्बंध में पूछे जाने पर एनएम- कुसुम कुमारी ने बताया कि इस स्वास्थ्य उपकेंद्र में दूर-दूर के गांवों से प्रसव हेतु महिलाओं को लाया जाता है। प्रसव भी सफल होता है। वहीं उन्होंने जिला के उच्च अधिकारियों से एक चापाकल की मांग की है, जिससे मरीजों व उनके साथ आए परिजनों को पानी पीने के लिए सुविधा उपलब्ध हो सके। वहीं स्वास्थ्य विभाग से दो बेड व आक्सीजन गैस की व्यवस्था उपब्ध कराने की मांग की है। साथ ही प्रसव से सम्बंधित सभी दवाओं की मांग की है, जिससे पूर्ण रूप से सफलता पूर्वक प्रसव हो सके ताकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ व सुरक्षित रहें।
क्या कहती हैं "बीडीसी".....
बीडीसी- उषा देवी ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र पर जाने वाली सड़क की स्थिति बद से भी बदतर है। लोगों व वाहनों के आवागमन में काफी दिक्कतें होती हैं। उन्होंने सड़क निर्माण कराने व उक्त स्वास्थ्य उपकेंद्र में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। मौके पर बीडीसी प्रतिनिधि- नंदलाल साव सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित थे।
 झारखंड-संवाददाता,(विवेक चौबे) |